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मेरा प्रमोशन 2006 से 2008 के बीच हुआ था। क्या मेरी पे सही फिक्स हुई थी?

लेखक: एडवोकेट रामनिवास बंसल

मुख्य बात

6th CPC लागू होने के दौरान, यानी 1 जनवरी 2006 से अक्टूबर 2008 के बीच, प्रमोट हुए जिन कर्मियों की पे समय पर ऑप्शन न देने के कारण कम फायदेमंद ऑप्शन पर फिक्स हुई, वे अपनी पे सबसे फायदेमंद ऑप्शन पर दोबारा फिक्स करवाने के हकदार हैं। मई 2025 में दिल्ली हाई कोर्ट ने इस स्थिति को सही ठहराया।

ऐसा क्यों होता है

6th CPC अक्टूबर 2008 में जारी निर्देशों के ज़रिए 1 जनवरी 2006 से लागू किया गया। इस बीच प्रमोट हुए कर्मियों को चुनना था कि उनकी पे 1 जनवरी 2006 से फिक्स हो या प्रमोशन की तारीख से। कई लोगों को इस ऑप्शन की जानकारी नहीं थी या उन्होंने देर से ऑप्शन दिया, और उन पर अपने आप कम फायदेमंद ऑप्शन लागू हो गया। यह गलती फिर उनकी 7th CPC पे में और बाद में उनकी पेंशन में भी चली जाती है।

ट्रिब्यूनल कैसे फैसला करता है

आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल लगातार कहता आया है कि कर्मियों को दोनों में से ज़्यादा फायदेमंद ऑप्शन देना खुद पे अधिकारियों की ज़िम्मेदारी थी, चाहे ऑप्शन दिया गया हो या नहीं। सूबेदार एम.एल. श्रीवास्तव बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (2021) में ट्रिब्यूनल ने JCOs और अन्य रैंक के लिए दोबारा पे फिक्सेशन का आदेश दिया था। यूनियन ऑफ इंडिया ने इस फैसले को चुनौती दी, और मई 2025 में दिल्ली हाई कोर्ट ने वह चुनौती खारिज कर दी और माना कि यह निर्देश कर्मियों के फायदे के लिए था, इसलिए इसे सैनिकों के पक्ष में पढ़ा जाना चाहिए। अक्टूबर 2024 में प्रिंसिपल बेंच ने यही सिद्धांत एयर फोर्स के एक सार्जेंट के मामले में लागू किया, जो अक्टूबर 2006 में लीडिंग एयरक्राफ्टमैन के पद पर प्रमोट हुए थे। ट्रिब्यूनल ने आदेश दिया कि उनकी 6th CPC पे सबसे फायदेमंद ऑप्शन पर दोबारा फिक्स की जाए, उसी हिसाब से उनकी 7th CPC पे और बाद के प्रमोशन भी दोबारा फिक्स हों, और तीन महीने के अंदर एरियर दिया जाए।

आपकी पे और पेंशन के लिए इसका क्या मतलब है

अगर आपका प्रमोशन जनवरी 2006 से अक्टूबर 2008 के बीच हुआ था और आपकी पे जूनियर से कम है, तो आपका दावा बन सकता है। चूंकि यह गलती आगे की पे और पेंशन में भी चलती रहती है, इसे ठीक करवाने से समय के साथ बड़ा फर्क पड़ सकता है।

एडवोकेट रामनिवास बंसल आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल, प्रिंसिपल बेंच, नई दिल्ली और दिल्ली हाई कोर्ट में प्रैक्टिस करते हैं। अपने केस पर सलाह के लिए कॉल करें +91 9810430799 या संपर्क फॉर्म भरें।

यह जानकारी केवल सामान्य जानकारी के लिए है और कानूनी सलाह नहीं है। हर मामला उसके अपने तथ्यों पर निर्भर करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मैं रिटायर हो चुका हूँ। क्या मेरी पेंशन ठीक हो सकती है?
पे दोबारा फिक्स करने के ट्रिब्यूनल के आदेशों में उससे जुड़े फायदे भी शामिल रहे हैं, जहाँ लागू हो वहाँ पेंशन भी। हर मामले को उसके तथ्यों के आधार पर देखना होगा।
क्या यह अफसरों पर भी लागू होता है?
हाँ। लेफ्टिनेंट कर्नल करण दुसाद बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (2022) में ट्रिब्यूनल ने तीनों सेनाओं के उन अफसरों के पे फिक्सेशन की समीक्षा का आदेश दिया था, जिनकी पे ऐसी ही परिस्थितियों में 1 जनवरी 2006 को फिक्स हुई थी।

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