क्या सर्विस छोड़ने के बाद भी डिसेबिलिटी पेंशन का दावा सफल हो सकता है?
लेखक: एडवोकेट रामनिवास बंसल
मुख्य बात
हाँ। जब पोस्ट डिस्चार्ज मेडिकल बोर्ड यह मानता है कि डिसेबिलिटी सर्विस के कारण बढ़ी (aggravated) है और उसे जीवन भर के लिए 20% या उससे ज़्यादा आंकता है, तो अधिकारी सिर्फ़ मेडिकल बोर्ड से असहमत होकर दावा खारिज नहीं कर सकते। मई 2026 में आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल ने कहा कि किसी मेडिकल राय को सिर्फ़ उससे ज़्यादा सक्षम मेडिकल राय से ही काटा जा सकता है, और 30% से ब्रॉड बैंड करके 50% डिसेबिलिटी पेंशन दी।
ऐसे दावे अक्सर क्यों खारिज होते हैं
कुछ बीमारियाँ, जैसे सुनने की क्षमता कम होना, सर्विस छोड़ने के बाद सामने आती हैं या बढ़ती हैं। ऐसे में पूर्व सैनिक पोस्ट डिस्चार्ज क्लेम के ज़रिए डिसेबिलिटी पेंशन के लिए आवेदन करते हैं। ये दावे अक्सर यह कहकर खारिज कर दिए जाते हैं कि पोस्ट डिस्चार्ज क्लेम की शर्तें पूरी नहीं होतीं, भले ही मेडिकल बोर्ड ने डिसेबिलिटी को सर्विस से जोड़ा हो।
ट्रिब्यूनल ने क्या फैसला दिया
मई 2026 में आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल, प्रिंसिपल बेंच, नई दिल्ली ने आर्मी के एक रिटायर्ड अफसर का मामला सुना, जिनकी सुनने की क्षमता गंभीर रूप से कम हो गई थी। पोस्ट डिस्चार्ज मेडिकल बोर्ड ने दर्ज किया था कि IPKF सर्विस के दौरान ऑपरेशनल फायरिंग की तेज़ आवाज़ के संपर्क में रहना उनकी ड्यूटी का हिस्सा था, डिसेबिलिटी को जीवन भर के लिए 30% आंका था, और उसे सर्विस से बढ़ी हुई माना था। फिर भी दावा खारिज कर दिया गया। ट्रिब्यूनल ने कहा कि मेडिकल बोर्ड ने डिसेबिलिटी का कारण और शुरुआत साफ़ तौर पर बताई थी, और पेंशन मंज़ूर करने वाला अधिकारी या कोई भी प्रशासनिक अधिकारी उससे ज़्यादा सक्षम मेडिकल राय के बिना इस मेडिकल राय को नहीं काट सकता। ट्रिब्यूनल ने मेडिकल बोर्ड की तारीख से 30% डिसेबिलिटी एलिमेंट देने और उसे 50% तक ब्रॉड बैंड करने का आदेश दिया, और केस दाखिल करने में हुई देरी भी माफ़ कर दी।
आपकी पेंशन के लिए इसका क्या मतलब है
अगर आपके मेडिकल बोर्ड ने आपकी डिसेबिलिटी को सर्विस के कारण हुई (attributable) या सर्विस से बढ़ी (aggravated) माना है, तो पेंशन अधिकारियों का इनकार आखिरी फैसला नहीं है। ट्रिब्यूनल ध्यान से देखता है कि मेडिकल बोर्ड ने असल में क्या दर्ज किया है।
एडवोकेट रामनिवास बंसल आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल, प्रिंसिपल बेंच, नई दिल्ली और दिल्ली हाई कोर्ट में प्रैक्टिस करते हैं। अपने केस पर सलाह के लिए कॉल करें +91 9810430799 या संपर्क फॉर्म भरें।
यह जानकारी केवल सामान्य जानकारी के लिए है और कानूनी सलाह नहीं है। हर मामला उसके अपने तथ्यों पर निर्भर करता है।