अगर अधिकारी AFT के आदेश का पालन न करें, तो क्या किया जा सकता है?
लेखक: एडवोकेट रामनिवास बंसल
मुख्य बात
आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल के पास अपने आदेशों का पालन न करने वाले अधिकारियों के खिलाफ अवमानना (contempt) की कार्यवाही शुरू करने का अधिकार है। अगर डिसेबिलिटी पेंशन, फैमिली पेंशन, एरियर या कोई अन्य राहत देने वाला AFT का आदेश तय समय में लागू नहीं होता, तो पालन करवाने के लिए अवमानना की अर्ज़ी दाखिल की जा सकती है।
आदेश का पालन न होने की समस्या
AFT से अनुकूल आदेश मिलना आधी लड़ाई है। पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों की एक आम और परेशान करने वाली समस्या यह है कि अधिकारी, जैसे रिकॉर्ड ऑफिस, PCDA और पेंशन अधिकारी, तय समय में आदेश लागू ही नहीं करते। कभी यह दफ़्तरी देरी की वजह से होता है, और कभी जानबूझकर लगता है। वजह चाहे जो हो, नतीजा यह होता है कि आवेदक, जो पहले ही महीनों या सालों तक मुकदमा लड़ चुका है, उसे अब भी वह राहत नहीं मिलती जिसका आदेश हुआ है।
कानून क्या कहता है
आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल एक्ट ट्रिब्यूनल को हाई कोर्ट की तरह अपने आदेशों की अवमानना पर दंड देने का अधिकार देता है। अगर पेंशन देने, एरियर चुकाने, रिकॉर्ड सुधारने या कोई और राहत देने का आदेश तय अवधि में लागू नहीं होता, तो आवेदक अवमानना की अर्ज़ी दाखिल कर सकता है। ट्रिब्यूनल ज़िम्मेदार अधिकारियों को बुला सकता है, तय अवधि में पालन का निर्देश दे सकता है, और गंभीर मामलों में दंड भी लगा सकता है।
अवमानना की कार्यवाही कैसे चलती है
अवमानना की अर्ज़ी उसी बेंच के सामने दाखिल की जाती है जिसने मूल आदेश दिया था। अर्ज़ी में बताया जाता है: (1) कौन सा आदेश पारित हुआ था, (2) पालन के लिए कितना समय दिया गया था, (3) आदेश का पालन नहीं हुआ, और (4) अधिकारियों को पालन न होने की जानकारी देने के लिए क्या कदम उठाए गए। फिर ट्रिब्यूनल अधिकारियों को नोटिस जारी करता है और पूछता है कि उनके खिलाफ अवमानना क्यों न शुरू की जाए। कई मामलों में सिर्फ़ अवमानना की अर्ज़ी दाखिल होने से ही आदेश का पालन हो जाता है।
व्यावहारिक सलाह
अवमानना की अर्ज़ी दाखिल करने से पहले अधिकारियों को आदेश और पालन की समय सीमा याद दिलाते हुए लिखित रिमाइंडर भेजना उचित है। सारे पत्र-व्यवहार का रिकॉर्ड रखें। अगर फिर भी पालन नहीं होता, तो बिना देर किए अवमानना की अर्ज़ी दाखिल करनी चाहिए। अनिश्चित समय तक इंतज़ार न करें, क्योंकि जितना लंबा इंतज़ार होगा, यह समझाना उतना मुश्किल होगा कि अवमानना पहले क्यों नहीं मांगी गई। जिस वकील ने मूल मामला लड़ा हो, वही अवमानना की अर्ज़ी सबसे अच्छे से दाखिल कर सकता है।
एडवोकेट रामनिवास बंसल आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल, प्रिंसिपल बेंच, नई दिल्ली और दिल्ली हाई कोर्ट में प्रैक्टिस करते हैं। अपने केस पर सलाह के लिए कॉल करें +91 9810430799 या संपर्क फॉर्म भरें।
यह जानकारी केवल सामान्य जानकारी के लिए है और कानूनी सलाह नहीं है। हर मामला उसके अपने तथ्यों पर निर्भर करता है।